🇮🇳 भारतीय शेयर बाज़ार: RBI की नीति, FIIs की बिकवाली और दिसंबर का आउटलुक


 

🇮🇳 भारतीय शेयर बाज़ार: RBI की नीति, FIIs की बिकवाली और दिसंबर का आउटलुक

आज का ट्रेंडिंग टॉपिक: RBI की MPC बैठक, रिकॉर्ड ऊँचाइयों पर बाज़ार का दायरा और सेक्टर रोटेशन

दिसंबर 2025 का महीना भारतीय शेयर बाज़ार के लिए एक निर्णायक दौर साबित हो रहा है। Nifty50 और Sensex ने नए सर्वकालिक उच्च (All-time Highs) स्तरों को छुआ है, लेकिन अब बाज़ार में मुनाफ़ावसूली (Profit Booking) और अस्थिरता (Volatility) बढ़ गई है। निवेशकों की नज़रें खास तौर पर RBI की मौद्रिक नीति और विदेशी निवेशकों के रुख पर टिकी हैं।


1. 🏦 RBI की MPC बैठक और ब्याज दरों पर रुख (RBI MPC Meeting and Rate Stance)

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक (3-5 दिसंबर) इस सप्ताह का सबसे महत्वपूर्ण घटनाक्रम है।

  • रेट कट की उम्मीदें कम: Q2 GDP ग्रोथ के 8.2% के मज़बूत आंकड़े आने के बाद, बाज़ार में रेपो रेट (Repo Rate) में कटौती (Rate Cut) की उम्मीदें लगभग खत्म हो गई हैं। मज़बूत ग्रोथ को देखते हुए RBI फिलहाल दरों को अपरिवर्तित (Unchanged) रखने की संभावना है।

  • बाज़ार पर असर: यदि RBI दरों को स्थिर रखता है, तो यह बैंकिंग और फाइनेंशियल शेयरों में कुछ हद तक स्थिरता ला सकता है। हालाँकि, बाज़ार RBI के मुद्रास्फीति (Inflation) और आर्थिक विकास (Growth) पर आगे के अनुमानों को बारीकी से देखेगा।


2. 📉 FIIs की बिकवाली बनाम DIIs की ख़रीदारी (FII Selling vs. DII Buying)

बाज़ार की मज़बूती के बावजूद, विदेशी संस्थागत निवेशक (FIIs) लगातार शुद्ध विक्रेता (Net Sellers) बने हुए हैं, खासकर नवंबर और दिसंबर 2025 में।

  • कारण:

    • डॉलर की मज़बूती: अमेरिकी फेडरल रिज़र्व द्वारा ब्याज दरों पर अनिर्णय और डॉलर की वैश्विक मज़बूती FIIs को पूंजी भारत से बाहर ले जाने के लिए प्रेरित कर रही है।

    • रुपये का रिकॉर्ड निचला स्तर: भारतीय रुपये का डॉलर के मुकाबले नए रिकॉर्ड निचले स्तर पर जाना भी FIIs के लिए चिंता का विषय है।

  • बाज़ार को सहारा: FIIs की बिकवाली को घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs), जैसे कि म्युचुअल फंड्स और इंश्योरेंस कंपनियों, की रिकॉर्ड ख़रीदारी ने संतुलित किया है। यह घरेलू पूंजी का प्रवाह बाज़ार को नीचे गिरने से बचा रहा है और अस्थिरता को सीमित कर रहा है।


3. 🚀 दिसंबर में ट्रेंडिंग सेक्टर्स और स्टॉक (Trending Sectors and Stocks in December)

तकनीकी रूप से, Nifty में 26,300 के स्तर पर प्रतिरोध (Resistance) और 26,000 के स्तर पर तात्कालिक समर्थन (Immediate Support) देखा जा रहा है। बाज़ार में अभी स्टॉक-विशेष कार्रवाई (Stock-Specific Action) और सेक्टर रोटेशन (Sector Rotation) हावी है।

सेक्टर (Sector)आउटलुक (Outlook)मुख्य कारण/ट्रेंड
IT (सूचना प्रौद्योगिकी)मज़बूत (Strong)ग्लोबल रेट कट की उम्मीदें, दिसंबर के महीने में बेहतर ऐतिहासिक प्रदर्शन।
Metal (धातु)मज़बूत (Strong)वैश्विक आर्थिक गतिविधियों में सुधार और चीन से मांग में बढ़ोतरी की उम्मीदें।
Auto (ऑटोमोबाइल)मज़बूत (Strong)नवंबर में बेहतर खुदरा बिक्री और मजबूत त्योहारी मांग के बाद बेहतर रुझान।
Banking & Financialsदायरे में (Range-Bound)RBI MPC बैठक के नतीजे और FIIs की बिकवाली के दबाव के चलते अस्थिरता।

💡 निवेशकों के लिए सुझाव (Advice for Investors)

बाज़ार में रिकॉर्ड ऊँचाई पर जाने के बाद अस्थिरता सामान्य है। निवेशकों को इन बातों पर ध्यान देना चाहिए:

  1. "Buy on Dips" रणनीति: यदि निफ्टी 26,000 के मुख्य समर्थन स्तर के पास आता है, तो उच्च गुणवत्ता वाले (High-Quality) और मज़बूत फंडामेंटल वाले शेयरों में निवेश करने पर विचार करें।

  2. लार्ज कैप पर ध्यान: अनिश्चितता के माहौल में, लार्ज कैप (Large Cap) शेयरों में ज़्यादा स्थिरता होती है। स्मॉल कैप (Small Cap) सेगमेंट में चुनिंदा (Selective) निवेश ही समझदारी है।

  3. पोर्टफोलियो का पुनर्मूल्यांकन: अपने पोर्टफोलियो में IT और मेटल जैसे सेक्टर्स के लिए जगह बनाएँ, जो इस समय अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं।

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